गिरडीह, अगस्त 5 -- पीरटांड़। सम्मेदशिखर पारसनाथ पहाड़ पर वर्षों से तीर्थयात्रियों को डोली के सहारे पर्वत वंदना कराने वाले मजदूरों की परंपरा अब धीरे-धीरे अतीत बनती जा रही है। पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ साथ अब रोजगार का भी स्वरूप बदल रहा है। कभी पारसनाथ पर्वत की यात्रा में डोली मजदूरों की अहम भूमिका हुआ करती थी। पर धीरे धीरे बदलते समय के साथ बाइक की सवारी का प्रचलन बढ़ गया है। लगातार बढ़ते बाइक प्रचलन के कारण पारम्परिक रोजगार के साधन संकट के मुहाने पर खड़ा हो गया है। बताया जाता है कि पहले के समय मे तिर्थयात्रियों की पारसनाथ यात्रा के लिए पैदल अथवा डोली की सवारी प्रमुख साधन हुआ करता था। क्षेत्र के हजारों हजार डोली मजदूर बुजुर्ग, अस्वस्थ और पैदल चढ़ाई करने में असमर्थ तीर्थयात्रियों को डोली में बैठाकर पहाड़ की कठिन पूरी कर पर्वत वंदना कराते थे...