प्रयागराज, मार्च 31 -- UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जीवन के मूल अधिकार को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कहा है कि अंतर्धार्मिक जोड़े की सुरक्षा आवश्यक है। कोर्ट ने लता सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और शाफिन जहां बनाम अशोकन केएम मामलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए कड़े शब्दों में कहा कि जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव करना संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध है। लिव-इन रिलेशनशिप किसी भी कानून के तहत प्रतिबंधित या दंडनीय अपराध नहीं है। इसके कोर्ट ने टिप्पणी की कि उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 भी अंतर्धार्मिक संबंधों या विवाह पर तब तक रोक नहीं लगाता, जब तक उसमें जबरन धर्मांतरण जैसा कोई तत्व शामिल न हो। कोर्ट ने कहा कि दो वयस्क व्यक्ति अपनी स्वतंत्र इच्छा से साथ रहने का निर्ण...