भभुआ, फरवरी 14 -- परंपरागत स्वाद को बचाए रखने की जिद, अस्थायी ठिकाने ने बढ़ाई रोज़गार की असुरक्षा महंगाई की मार से सिकुड़ती जा रही कमाई, फिर भी जारी है दुकानदार की अनवरत जंग (बोले भभुआ) भभुआ, नगर संवाददाता। लिट्टी-चोखा सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि आम लोगों की थाली और प्रदेश की पहचान से जुड़ा है। शहर के चौक-चौराहों व घरों में जब आग में लिट्टी सेंकी जाती है, तब उसकी महक लोगों को अपनी ओर खींचती है। लेकिन, इस खुशबू के पीछे छोटे विक्रेताओं का संघर्ष छिपा है। आटा, सत्तू, तेल, कोयला और मसालों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने उनके मुनाफे को कम कर दिया है। राजकिशोर, मोहन गुप्ता, श्री प्रकाश, चंद्रभूषण मौर्य आदि दुकानदार बताते हैं कि ग्राहक बढ़ी कीमत स्वीकार करने को तैयार नहीं होते, इसलिए मजबूरी में पुराने रेट पर ही बेचना पड़ता है। दिनभर मेहनत के बाद जो आम...