नई दिल्ली, नवम्बर 29 -- सुप्रीम कोर्ट मुसलमानों, विशेषकर दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित महिलाओं का खतना (FGM) करने की प्रथा पर प्रतिबंध लगाने संबंधी याचिका पर विचार करने के लिए शुक्रवार को सहमत हो गया है। जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा दायर याचिका पर केंद्र और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिए हैं। अदालत 'चेतना वेलफेयर सोसाइटी' की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दावा किया गया है कि यह प्रथा इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है और बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन करती है। याचिका में कहा गया है, ' POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) ऐक्ट के तहत किसी नाबालिग के जननांगों को गैर-चिकित्सकीय कारणों से छूना कानून का उल्लंघन है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि विश्व स्वास्थ्य...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.