शामली, सितम्बर 28 -- शामली। शहर के जैन स्थानक मंदिर में चल रहे चातुर्मास के दौरान संघ संचालक नरेश मुनि गुरुदेव ने लज्जा के महत्व पर प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि लज्जा का अर्थ शर्म, संकोच या हया है। यह मनुष्य के अंतरूकरण की वह अवस्था है, जो उसे बुरे आचरण से रोकती है। लज्जा जीवन में बुराइयों से बचाने वाली प्रहरी का काम करती है। नरेश मुनि ने कहा कि श्रावक के जीवन में लज्जा का भाव होना आवश्यक है। आंखों में लज्जा होनी चाहिए। इससे व्यक्ति गलत कार्यों से बचता है और स्वयं में सुधार का अवसर प्राप्त करता है। जो व्यक्ति लज्जा का त्याग कर देता है, वह जीवन में अनेक दुखों का सामना करता है। यह भी पढ़ें- Shamli News: क्षमावाणी पर्व पर सभी से क्षमा मांगकर प्रसन्न रहने का लिया संकल्प लज्जा मनुष्य को पवित्र बनाए रखने में सहायक है। उन्होंने प्रतिष्ठा की चाहत ...