गंगापार, अप्रैल 5 -- करमा और उसके आसपास के गांवों में किसान पहले पारंपरिक खेती करते थे जिनमें प्रमुख रूप से धान और गेहूं की फसल शामिल हैं। बाद में किसानों ने नकदी फसल के रूप में आलू की खेती चुना जिसमें उन्हें अच्छा लाभ मिलने लगा। एक दूसरे की देखादेखी क्षेत्र के दानपुर, करमा, बरौली, राजापुर, चिल्ली, चकिया आदि सभी गांवों के किसान आलू की खेती करने लगे। एक समय ऐसा आया कि लोग अपने आवश्यकता के अनुसार गेहूं की बुआई करते थे और बाकी जमीन में आलू लगाते थे। अधिक उत्पादन होने के साथ ही आलू के भाव मे उतार चढ़ाव आने लगा जिससे आलू किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा। धीरे धीरे कुछ किसान आलू की खेती छोड़कर सब्जी, फूल आदि की खेती करने लगे।आलू किसानों के अनुसार आलू एक अच्छी लागत वाली फसल है जिसमें बीज, डीएपी, यूरिया, जिंक, पोटाश के अलावा खेत की जुताई, बुआई, सिं...
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