अमरोहा, मई 10 -- शहर के मोहल्ला कुरैशी में लखौरी ईंट से बनी अलीजान मंजिल आज भी अंग्रेजी दौर की यादें समेटे हुए है। अंग्रेजी शासन काल में यहां अदालत लगती थी। बकायदा मुकदमों की सुनवाई होती थी। दीवानखाना, हवालात और बेरिस्टर के बैठने की जगह के निशां यहां आज भी मौजूद हैं। साल 1814 में तामीर इस इमारत पर उस दौर में अंग्रेजी फौज ने कब्जा कर लिया था। इसके बाद इस इमारत के मालिक को खुद अपने नाम पर इसे नीलामी में खरीदना पड़ा था। इंसेट : यह भी पढ़ें- 1857 की क्रांति का गवाह है पुराना लोहा बाजार स्थित शहीद स्मारकपीर कमाल उद्दीन ने 45 बीघे में कराई थी इमारत की तामीर अमरोहा। मौजूदा वक्त में इस इमारत के चारों तरफ घनी आबादी मौजूद है। साल 1814 में पीर कमालुद्दीन ने 45 बीघे में इस दीवानखाने की तामीर कराई थी। दीवानखाने के साथ ही उन्होंने एक खूबसूरत बंगला भी बन...