भागलपुर, फरवरी 27 -- चानन, निज संवाददाता। अवध में होली खेले रघुवीरा, ओ केकरे हाथ ढोलक भल सोहै केकरे हाथ मंजीरा। राम के हाथ ढोलक भल सोहे लक्ष्मण हाथे मंजीरा। ए केकरे हाथ कनक पिचकारी, ए केकरे हाथे अबीरा। ए भरत के हाथ कनक पिचकारी, शत्रुध्न के हाथ अबीरा। अवध में होली खेले रघुवीरा कबीरा, सा रा रा रा रारा, जैसे मधुर गीतों की मंद फुहार पहले बसंत पंचमी से ही ढोलक की थाप के साथ गीतों के बोल सुनकर मन मंत्रमुग्ध हो जाते थे। होली उमंगों का पवित्र त्योहार माना जाता है। पहले हर टोले में अलग-अलग मंडली बैठती थी और फाग का गायन होता था। रंग अबीर गुलाल इस त्योहार में उमंग भर देते थे।

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