भागलपुर, जून 19 -- कजरा से वैदेही शरण की रिपोर्ट: ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से मिलने वाला महुआ पशुओं के लिए बेहद पौष्टिक आहार माना जाता है। कई गांवों में इसे पशुओं का 'किशमिश' भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें ऐसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं जो पशुओं के स्वास्थ्य और उत्पादन क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं। पशु मामलों के जानकार नीरज कुमार ने बताया कि महुआ में विटामिन, मिनरल्स तथा प्राकृतिक ऊर्जा देने वाले तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद रहते हैं। यही कारण है कि इसे पशुओं के लिए प्राकृतिक टॉनिक के रूप में देखा जाता है। हालांकि इसका सेवन हमेशा सीमित मात्रा में ही कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुधारू पशुओं को नियंत्रित मात्रा में महुआ खिलाने से दूध उत्पादन में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है। वहीं गैर-दुधारू पशुओं में यह शरीर...