शिमला, अगस्त 12 -- करीब 49 साल तक चली कानूनी लड़ाई में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जमीन और काश्तकारी अधिकार को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ किया है कि किसी जमीन या मकान की लंबे समय तक देखभाल करने वाला कोई केयरटेकर या नौकर केवल इस आधार पर उस संपत्ति पर मालिकाना हक या काश्तकारी अधिकार का दावा नहीं कर सकता कि उसने लंबे समय तक उसकी देखरेख की है। इस मामले में न्यायाधीश रोमेश वर्मा ने केयरटेकर की अपील खारिज करते हुए निचली अदालतों के फैसलों को बरकरार रखा है। यह विवाद वर्ष 1977 में कांगड़ा जिले के धर्मशाला की अदालत में शुरू हुआ था। वादी ने प्रतिवादी के खिलाफ जमीन की बहाली और कब्जा वापस दिलाने के लिए मुकदमा दायर किया था। वादी का कहना था कि उसके पिता ने अपनी अनुपस्थिति में प्रतिवादी को जमीन और मकान की देखरेख के लिए रखा था। आरोप था कि बाद मे...