लखनऊ, मई 22 -- लखनऊ, विधि संवाददाताहाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक अहम फैसले में कहा है कि सिर्फ आपराधिक मुकदमों के लंबित होने के आधार पर किसी व्यक्ति का शस्त्र लाइसेंस निरस्त नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि लाइसेंस रद्द करने से पहले सक्षम प्राधिकारी को यह संतुष्टि दर्ज करनी आवश्यक है कि हथियार का बने रहना सार्वजनिक शांति या जनसुरक्षा के लिए वास्तविक खतरा है।न्यायमूर्ति इरशाद अली की एकल पीठ ने यह आदेश राजेश कुमार सिंह की याचिका पर पारित किया। याची ने वर्ष 2003 में उसका डीबीबीएल गन लाइसेंस निरस्त किए जाने तथा वर्ष 2008 में अपील खारिज करने के आदेश को चुनौती दी थी। यह भी पढ़ें- राजा भैया, बृजभूषण, धनंजय समेत 19 नेताओं का हाईकोर्ट ने ब्यौरा मांगा, कहा- कैसे मिले हथियार लाइसेंस याचिका को निस्तारित करते हुए न्यायालय ने उपरेाक्त टिप्पण...