अंबेडकर नगर, मार्च 10 -- अम्बेडकरनगर। नगर के पटेलनगर निवासी समाजसेवी मोहम्मद तालिब ने कहा कि हदीस शरीफ में रोजे का वास्तविक उद्देश्य स्पष्ट किया गया है। सहीह बुखारी के अनुसार यदि कोई व्यक्ति रोजे की हालत में झूठ बोलना और बुरे कर्म करना नहीं छोड़ता, तो अल्लाह को उसके खाने-पीने का त्याग स्वीकार नहीं होता। उन्होंने कहा कि रमजान का महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसी पवित्र महीने में कुरआन शरीफ का अवतरण हुआ। इसलिए यह समय केवल तिलावत तक सीमित न रहकर उसके संदेशों पर चिंतन-मनन और उन्हें जीवन में उतारने का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि रमजान सामाजिक समानता और करुणा की भावना को भी मजबूत करता है। रोजा इंसान को भूख-प्यास का एहसास कराकर अमीर-गरीब के बीच की दूरी कम करता है। जकात और सदका के माध्यम से सहयोग, संवेदना और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।...
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