सिमडेगा, मार्च 25 -- सिमडेगा, प्रतिनिधि। जिले में गैस की किल्लत ने दिहाड़ी मजदूरों की जिंदगी को और कठिन बना दिया है। रोज कमाकर खाने वाले श्रमिक अब भोजन की व्यवस्था को लेकर गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। मजदूर रामा एक्का, रंजीत लोहरा, बिहानी देवी आदि मजदूरों ने कहा कि पहले वे लोग नि:शुल्क दाल भात केन्द्रों अथवा सस्ते होटलों में जाकर खाना खाते थे। कई बार ठेला में समोसा, कचौड़ी, चाउमिन, धुसका वगैरह खाकर काम चला लेते थे। लेकिन अब गैस की अनुपलब्धता के कारण शहर का कई होटल बंद हो चुके हैं। वहीं ठेका में मिलने वाले समोसा, कचौरी, धुसका, चाऊमीन और मंचूरियन जैसे नाश्ते के आइटम भी मंहगे हो गए हैं। जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है। पहले कम पैसों में यही नाश्ता उनके लिए सहारा होता था। ऐसे में कई मजदूर दिनभर बिना भोजन के काम करने को मजबूर हैं। वहीं शाम ...