सीवान, मार्च 14 -- सीवान/रघुनाथपुर, एक संवाददाता। रोजा एक इबादत है। जो कि रमजान महीने में 1 माह के लिए रखे जाते है। इस्लाम में रोजे का मतलब होता है केवल अल्लाह (ईश्वर) के लिए और उसके हुक्म से भोर से लेकर सूरज डूबने तक खाने-पीने और सभी बुराइयों से स्वयं को रोके रखना। यह हर व्यस्क मुसलमान के लिए अनिवार्य हैं। रोजे का 1 मकसद यह है कि भूख-प्यास की तकलीफ का अहसास हो ताकि वह भी भूखों की भूख और प्यासों की प्यास में उनका हम दर्द बन सकें। यह संदेश रोजेदारों को देते हुए हकाम सीवान के मौलाना वसी अहमद गौसी ने कहा कि क़ुरआन जो कि आखरी ईश्वरीय ग्रन्थ है, में साफ तौर से लिखा है कि जैसे तुम से पहले के लोगों पर अनिवार्य किये गए थे, अब हम देखते हैं। सनातन धर्म में रोजे को व्रत या उपवास कहते हैं। व्रत का आदेश करते हुए वेद कहते हैं, 'व्रत के संकल्प से वह पवित...