लखीमपुरखीरी, अप्रैल 8 -- एक अप्रैल की रात मेरठ में हुए सड़क हादसे में मरने वाले बथुआ टांडा गांव के तीन मजदूर अकेले नहीं हैं जो काम की तलाश में जान जोखिम में डालकर दूसरे जिलों में नौकरी करने गए थे। टांडा गांव समेत इलाके के तमाम लोग दूसरे जिलों ही नहीं, दूसरे प्रदेशों तक मजदूरी करने जाते हैं। इनमें विभिन्न हादसों में कई की मौत भी हो चुकी है। रोजगार की तलाश में गांव के चालीस से ज्यादा परिवार अपने घरों पर ताला लगाकर दूसरे राज्यों में मजदूरी कर रहे हैं। महीनों से बंद दरवाजों वाले सूने पड़े घर गांव से रोजगार की तलाश में बाहर जाने वालों की कहानी खुद बयां कर रहे हैं। तीन दिन पहले मेरठ में हुए सड़क हादसे में सिंगाही थाने के बथुआ टांडा गांव के तीन मजदूरों अरशद, बृजमोहन और अलीमुद्दीन की जान चली गई थी। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रुस्तम अली के मुताबिक चार हज...