बरेली, जुलाई 7 -- बरेली में पहली बार स्पेशल बच्चे सामान्य बच्चों के साथ जब रैंप पर उतरे तो हर कोई हैरान रह गया। किसी को उम्मीद नहीं थी कि दिव्यांग बच्चे भीड़ के सामने रैंप पर इस तरीके का प्रदर्शन करेंगे। दिव्यांग बच्चों के लिए वन टीचर-वन कॉल अभियान शुरू करने वाली टीचर दीपमाला पांडेय की इस आयोजन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही। 27 मार्च, यही वह दिन था जब इस कहानी का पहला अध्याय लिखा गया। पहला ऑडिशन था। शायद किसी के लिए यह सिर्फ़ एक मॉडलिंग ऑडिशन रहा होगा, लेकिन स्पेशल बच्चों के लिए यह अपनी पहचान बनाने की पहली दस्तक थी। कुछ बच्चे झिझक रहे थे, कुछ घबराए हुए थे, लेकिन हर चेहरे पर एक अनकहा सवाल था- कि क्या हमें भी मौका मिलेगा? आयोजन की सूत्रधार दीपमाला पांडे बताती है कि मुझे आज भी वह दिन याद है, जब मैं दिव्यांग बच्चों के स्कूल दिशा इंटर कॉलेज क...