बागेश्वर, अगस्त 19 -- गरुड़, संवाददाता। केंद्रीय रेशम बोर्ड और केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के तत्वावधान में चल रहे अभियान के तहत दूदिला गांव में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। 'मेरा रेशम, मेरा अभिमान' अभियान के तहत किसानों को रेशम उत्पादन और कीट पालन की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि पारंपरिक खेती के साथ रेशम उत्पादन अपनाकर किसान अपनी आर्थिकी मजबूत कर सकते हैं। जिला प्रभारी ब्रजेश रतूड़ी ने बताया कि रेशम कीट पालन करीब 20 दिन में पूरा होता है और किसान साल में दो बार इसका लाभ ले सकते हैं। इससे सालाना करीब 40 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आय हो सकती है। डॉ. विक्रम कुमार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाना केंद्रीय रेशम बोर्ड का मुख्य उद्देश्य है। केएस चौहान ने बताया कि शहतूत का पौधा आसानी से उगाया ज...