नई दिल्ली, जुलाई 13 -- संयुक्त राष्ट्र विश्व मौसम संगठन (WMO) के अनुसार, रेत और धूल के तूफान 150 से अधिक देशों में लगभग 33 करोड़ लोगों को प्रभावित करते हैं। ये स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर गंभीर असर डाल रहे हैं। डब्ल्यूएमओ की प्रतिनिधि लॉरा पैटरसन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को बताया कि हर साल लगभग 2 अरब टन धूल निकलती है, जो मिस्र की 300 गीजा पिरामिडों के बराबर है। उन्होंने कहा कि दुनिया की 80% से अधिक धूल उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व के रेगिस्तानों से आती है। यह सैकड़ों व हजारों किलोमीटर दूर तक महाद्वीपों और महासागरों को पार करते हुए फैलती है। यह भी पढ़ें- भारत से सैन्य संघर्ष के दौरान परमाणु हमले की थी तैयारी? शहबाज शरीफ का क्या जवाब यह भी पढ़ें- आखिरकार रूस ने कर ही ली पाकिस्तान के साथ डील, GDP को होगा अरबों का फायदा यह भी पढ़े...
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