भागलपुर, अप्रैल 16 -- भागलपुर, वरीय संवाददाता। रेणु का साहित्य गांव, समाज और मानवीय संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज है। रेणु के शब्दों में जीवन की सच्चाई और लोक की आत्मा बसती है जो पाठकों की आत्मा को स्पर्श करती है। उनकी लेखनी की कई विशेषताएं थी जो पाठकों को अपनी ओर खींचती थी। यह बातें मारवाड़ी कॉलेज के महिला प्रभाग के हॉल में प्राचार्य डॉ. संजय कुमार झा ने बतौर मुख्य अतिथि अध्यक्षीय संबोधन के दौरान कही। वे कॉलेज में एक दिवसीय संगोष्ठी पर अपनी बातें रख रहे थे। इसका विषय 'रेणु : मारे गए गुलफाम' था।मुख्य वक्ता प्रो. शिव शंकर मंडल ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि रेणु संवेदनाओं के कथाकार थे। वे अपने साहित्य में किसी प्रकार के कृत्रिम हस्तक्षेप के पक्षधर नहीं थे। उनका लेखन समाज के यथार्थ को सजीव रूप में प्रस्तुत करता है। इसी कारण वे आज भी जनमानस क...