लखनऊ, मार्च 24 -- लखनऊ, विशेष संवाददाता। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने केंद्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा जारी ताजा रेटिंग में पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार को आधार बनाते हुए इनके प्रस्तावित निजीकरण के निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की है। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि जब दोनों निगमों की कार्यक्षमता लगातार बेहतर हो रही है तो निजीकरण का कोई औचित्य शेष नहीं रह जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन अब तक गलत और बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत आंकड़ों के आधार पर घाटे का हवाला देता रहा है, जिसके चलते निजीकरण का निर्णय लिया गया। इस निर्णय से ऊर्जा क्षेत्र में औद्योगिक शांति प्रभावित हुई है। संघर्ष समिति ने कहा कि विगत 482 दिनों से आंदोलनरत रहने के बावजूद बिजली कर्...