नई दिल्ली, दिसम्बर 15 -- आज भारत की अर्थव्यवस्था एक अजीब विरोधाभास दिखा रही है। दुनिया में सबसे तेज जीडीपी ग्रोथ, लगभग शून्य मुद्रास्फीति और नियंत्रित राजकोषीय घाटा होने के बावजूद भारतीय रुपया एशिया की सबसे खराब मुद्रा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक 17 अरब डॉलर निकाल चुके हैं और 2024-25 में शुद्ध एफडीआई लगभग खत्म हो गया। मजबूत घरेलू आधार अब विदेशी भरोसे की गारंटी नहीं देता।पुराना व्यापार घाटा, नई चुनौती भारत एशिया का इकलौता बड़ा विकासशील देश है, जो दशकों से व्यापार घाटा चला रहा है। एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोना और मशीनरी के आयात से निर्यात ज्यादा है। 30 साल तक विदेशी निवेशकों के भरोसे से यह घाटा ताकत बना रहा। 1990 से 1 ट्रिलियन डॉलर एफडीआई आया, विदेशी मुद्रा भंडार दुनिया के सबसे बड़े हो गए। नीतिगत माहौल, मजबूत संस्थाओं और उच्च रिटर्न ने निव...