नई दिल्ली, सितम्बर 30 -- यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी को एक बड़ा जोखिम भी माना जाता है। दरअसल इसमें सफलता दर बेहद कम (लगभग 0.1 फीसदी) है। हर साल करीब 10 लाख युवा फॉर्म भरते हैं, जिनमें से केवल 1000 के आसपास उम्मीदवारों का ही चयन होता है। सालों साल तैयारी के बावजूद भी लाखों का सेलेक्शन नहीं हो पाता। उन्हें कई बरसों की मेहनत का कोई सर्टिफिकेट डिग्री नहीं मिलते। ग्रेजुएशन की डिग्री पर धूल पड़ जाती है और स्किल में जंग लग जाता है। प्राइवेट नौकरी को लेकर जरूरी उत्साह भी ठंडा पड़ जाता है। ऐसी अनिश्चितता की स्थिति में करियर को कैसे रीसेट किया जाए, इसकी शानदार मिसाल दी है सुदर्शन रावनकोले ने। 2018 में बीटेक करने के बाद उन्होंने अपना करियर यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में लगा दिया। तीन बार परीक्षा दी लेकिन सफलता नहीं मिली। वह करीब...