नई दिल्ली, मार्च 16 -- एक छोटे से रिश्वत मामले के शुरू होने के साढ़े तीन दशक से भी ज्यादा समय बाद, सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के एक पूर्व आबकारी कांस्टेबल की सजा एक साल कम कर दी। जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच उस पूर्व कांस्टेबल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने उत्तराखंड हाईकोर्ट के 2012 के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ उसकी अपील खारिज कर दी थी। ट्रायल कोर्ट ने उसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दो साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी।हाल ही में जारी जारी एक आदेश में पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के उस फैसले में कोई गलती नहीं थी, जिसमें उसने ट्रायल कोर्ट की सजा को बरकरार रखा था, लेकिन वह अधिकारी, जिसकी उम्र अब 75 साल हो चुकी है, पहले ही दो महीने से ज्यादा समय जेल में बिता चुका है।...
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