रिश्तेदार होने भर से खारिज नहीं हो सकती गवाही, अदालत ने बचाव पक्ष का तर्क नकारा
औरैया, अगस्त 20 -- दोहरे हत्याकांड के फैसले में अदालत ने पीड़ित के रिश्तेदार गवाहों की विश्वसनीयता को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि घटना के दो महत्वपूर्ण गवाह हितबद्ध हैं, इसलिए उनकी गवाही पर विश्वास नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। डीजीसी अभिषेक मिश्रा ने बताया कि न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि आपराधिक मुकदमे में किसी गवाह की गवाही केवल इस आधार पर नहीं नकारी जा सकती कि वह पीड़ित का रिश्तेदार या परिवार का सदस्य है। ऐसे गवाह की गवाही का सावधानीपूर्वक परीक्षण किया जाना चाहिए और यदि वह अन्यथा विश्वसनीय है तो उसके आधार पर भी दोषसिद्धि की जा सकती है। यह भी पढ़ें- घायल गवाहों की मौजूदगी पर अदालत ने जताया भरोसा, गवाही बनी दोषसिद्धि की मजबूत कड़ी अदा...
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