रांची, सितम्बर 30 -- रांची, वरीय संवाददाता। रिम्स में पहली बार ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वॉल्व इम्प्लांटेशन (टीएवीआई) की प्रक्रिया सफलतापूर्वक की गई। संस्थान के अनुसार, झारखंड के किसी सरकारी अस्पताल में यह पहली सफल टीएवीआई प्रक्रिया है। कार्डियोलॉजी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. मृणाल कुंज के नेतृत्व में टीम ने प्रक्रिया पूरी की। टीएवीआई गंभीर एओर्टिक वॉल्व रोग से पीड़ित मरीजों के इलाज की आधुनिक तकनीक है। इसमें ओपन हार्ट सर्जरी के बजाय कैथेटर के जरिए खराब एओर्टिक वॉल्व की जगह कृत्रिम वॉल्व लगाया जाता है। इस प्रक्रिया में कार्डियोलॉजी के साथ कार्डियक सर्जरी, एनेस्थीसिया, कैथ लैब और नर्सिंग टीम की भूमिका रही। रिम्स में इस सुविधा की शुरुआत से गंभीर एओर्टिक वॉल्व रोग से पीड़ित मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों के अस्पतालों में जाने की जरूरत कम ह...