रांची, जून 6 -- रांची, संवाददाता। रिम्स की अधिग्रहित जमीन से जुड़े बहुचर्चित फर्जीवाड़ा मामले में जेल में बंद दो आरोपियों राजकिशोर बड़ाइक और कार्तिक बड़ाइक को अदालत से राहत नहीं मिली। एसीबी के विशेष न्यायाधीश ओंकारनाथ चौधरी की अदालत ने शनिवार को दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी। मामले में सुनवाई के बाद अदालत ने 3 जून को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। दोनों 7 अप्रैल से न्यायिक हिरासत में हैं। यह मामला रिम्स की वर्ष 1964-65 में अधिग्रहित करीब 9.65 एकड़ जमीन से जुड़ा है। आरोप है कि अभियुक्तों ने आपसी मिलीभगत से फर्जी वंशावली तैयार कर सरकारी अधिग्रहित भूमि को निजी संपत्ति के रूप में दर्शाने की साजिश रची। इसके आधार पर जमीन पर अवैध कब्जा कर अपार्टमेंट, दुकान और मकान का निर्माण कराया गया। झारखंड हाईकोर्ट के सख्त निर्देश के बाद एंटी करप्शन ब्यू...