फतेहपुर, जून 30 -- फतेहपुर। सालों की तपस्या के बाद मिला सफेद कोट सिर्फ एक लिबास नहीं, बल्कि 24 घंटे की जिम्मेदारी है। अपनों की शादी और त्योहारों की खुशियां भूलकर सरकारी डॉक्टर रोज़ाना 16 से 18 घंटे जिले की सेहत संवारने में खपा रहे हैं। डॉक्टरों की कमी और संसाधनों की कमी के बीच, हर दिन 250 मरीजों का बोझ उठाने वाले इन डॉक्टरों की नींद आधी रात को भी आपातकालीन कॉल पर टूट जाती है। इसके बावजूद महामारी के दौर से लेकर रोज़ाना की इमरजेंसी तक, मरीजों के चेहरे पर लौटती मुस्कान ही इनके जीवन का सबसे बड़ा पुरस्कार है। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर आइए जानते हैं जिले के इन जांबाज डॉक्टरों के संघर्ष और सेवा की अनकही दास्तां। एक डॉक्टर का दिन, 18 घंटे मरीजों के नाम यह भी पढ़ें- डॉक्टर दिवस की पूर्व संध्या पर चिकित्सकों का सम्मानएक डॉक्टर का दिन सुबह छह बजे द...