रायबरेली, जून 23 -- रायबरेली, संवाददाता। राजनीति विज्ञान अध्ययन एवं शोध संस्थान की ओर आयोजित गोष्ठी में पूर्व प्राचार्य डॉ. राम बहादुर वर्मा ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची में उल्लिखित दल बदल निरोध कानून, दल बदल को रोकने के बजाय उसे व्यापक तथा वैध बनाने में सफल हो रहा है। अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल में संविधान के कार्य करण की समीक्षा के लिए बने राष्ट्रीय आयोग ने मार्च 2002 में अपने प्रतिवेदन में कहा था कि स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए कि जो कोई विधायक व सांसद अपना दल छोड़े या उसके विरुद्ध मतदान करें , उसे तुरंत अपनी सदस्यता से त्यागपत्र देकर पुन: चुनाव लड़ना चाहिए। यह भी पढ़ें- गोवा से आएगा राहत का पैगाम? पार्टी में टूट के बीच ममता, उद्धव, केजरीवाल को क्यों बड़ी उम्मीद पुन: चुनाव जीतने पर ही उसे मंत्री पद मिलना चाहिए। इससे दल बदल की घटनाओ...