एटा, जून 3 -- कुंडा धाम आश्रम में चल रही सात दिवसीय श्रीमद भगवत कथा के पाँचवें दिन वृंदावन धाम से पधारे आचार्य महेश किंकरजी महाराज की ओर कक्षा कहीं। राम वन गमन और राम केवट संवाद का मार्मिक वर्णन किया। राम वन गमन और राम भरत मिलाप की कथा सुनकर जहां श्रोताओं के नेत्रों से आंसुओं की धार बहने लगी वही राम केवट संवाद श्रोताओं को ज्ञान की प्राप्ति हुई। उन्होंने कथा में कहा कि राम भरत मिलाप कथा सुन श्रोताओं की आंखों से अश्रु धार बहने लगी। केवट यह भी जानते थे कि भगवान राम चाहते तो राजा बलि की यहां की तरह भी नदी को लांघ जाते मगर वे गंगा नदी को पार नहीं कर सकते थे। क्योंकि गंगा नदी उनकी पुत्री के समान है और कोई भी पिता अपनी पुत्री को लांग नहीं सकता है। इसलिए आज भगवान राम की ओर देखते हुए केवट कहता है कि प्रभु आज मैया माता लक्ष्मी का रूप मैया सीता और श...