सोनभद्र, मार्च 27 -- ​बीजपुर। स्थानीय दुधहिया देवी मंदिर प्रांगण में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के आठवें दिन शुक्रवार को प्रभु राम के वनवास का मार्मिक प्रसंग सुनाया गया। कथा व्यास राममोहन दास रामायणी ने जब अपनी ओजस्वी वाणी में राम-सीता और लक्ष्मण के अयोध्या त्याग का वर्णन किया तो पांडाल में उपस्थित सैकड़ों भक्तों की आंखे नम हो गई। ​कथा के क्रम को आगे बढ़ाते हुए रामायणी ने कहा कि राम का वनवास केवल एक राजा के पुत्र का निष्कासन नहीं बल्कि अधर्म के विनाश की भूमिका थी। उन्होंने बताया कि कैसे पिता के वचनों को निभाने के लिए श्रीराम ने सहर्ष राजसी सुखों का त्याग कर दिया। उन्होंने कहा जहां राम हैं वहीं अयोध्या है। इस दौरान राम वन गमन के भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। कथा के बाद भक्तों ने एक स्वर में हनुमान चालीसा का पाठ किया, जिससे पूर...