लखीमपुरखीरी, नवम्बर 3 -- सिंगाही। कस्बे के दशहरा मेले में सोमवार को नाटक कलाकारों ने धनुष यज्ञ का मंचन किया। राक्षसी ताड़का के वध के बाद राम और लक्ष्मण को ऋषि विश्वामित्र राजा जनक के दरबार लेकर पहुंचे। वहां राजा जनक की पुत्री सीता का स्वयंवर है। स्वयंवर में कई स्थानों के बड़े-बड़े दिग्गज राजा सीता से विवाह के लिए वहां रखा भगवान शिव का धनुष तोड़ने गए लेकिन पूरी ताकत लगाने के बावजूद वे उसे हिला तक नहीं सके। राजा जनक को निराश देख ऋषि विश्वामित्र ने राम से धनुष भंग करने का आदेश दिया। इस पर भगवान राम ने एक ही झटके में धनुष उठाकर तोड़ दिया। चारों तरफ उनकी जय जयकार होने लगी। पंडाल में बैठे लोगों ने श्रीराम के जयकारे लगाए।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित...