शामली, सितम्बर 29 -- शामली। शहर के जेजे फार्म में चल रही श्रीराम कथा के सातवें दिन संत प्रवर विजय कौशल जी महाराज ने धनुष भंग के बाद भगवान श्रीराम और परशुराम संवाद, राम-जानकी विवाह तथा विदाई प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि श्रीराम का संपूर्ण जीवन विभिन्न विचारधाराओं को जोड़ने और समाज में समन्वय स्थापित करने का संदेश देता है। परशुराम संवाद का प्रसंग सुनाते हुए विजय कौशल महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष तोड़े जाने की टंकार से परशुराम जी का तप भंग हो गया। वे फरसा लेकर जनकपुर की सभा में पहुंचे और खंडित धनुष देखकर क्रोधित हो उठे। परशुराम जी ने राजा जनक से धनुष तोड़ने वाले के बारे में पूछा। भगवान श्रीराम ने अत्यंत विनम्रता से स्वयं को उनका दास बताते हुए कहा कि धनुष तोड़ने वाला उनका कोई सेवक ही होगा। इसके बाव...