वाराणसी, जून 8 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। अयोध्या नगरी चारों भाइयों के विवाह की खुशी में डूबी थी। राजा दशरथ प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारी में जुटे थे। राजमहल में हर्षोल्लास था। निर्धारित ढंग से सारा कार्यक्रम चल रहा था कि महारानी कैकेयी के कदम ने वातावरण में विषाद घोल दिया। हंसते-खिलखिलाते चेहरे मायूस हो गया। आंखों में खुशी की चमक की जगह दुख के आंसू थे। कैकेयी ने अपने पुत्र भरत के लिए राजसिंहासन और प्रभु श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मानकर अयोध्यावासियों पर वज्रपात कर दिया था। पातालपुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु बालक देवाचार्य कहते हैं कि प्रत्यक्ष रूप से यह कृत्य कष्टकारी था लेकिन इसका उद्देश्य बहुत ही पवित्र था। धरती पर राक्षसों के अंत के लिए यह जरूरी था। यह भी पढ़ें- बासुकीनाथ में श्रीराम कथा सुनने के लिए उमड़ी भक्तों की भीड़ कै...