कोडरमा, मार्च 16 -- झुमरी तिलैया निज प्रतिनिधि। सात दिवसीय श्री राम कथा महोत्सव के पांचवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा के दौरान शबरी भक्ति, भरत विलाप और सुग्रीव मिलन के मार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कार्यक्रम की शुरुआत व्यास पीठ की पूजा व माला अर्पण के साथ हुई। पूजा भारती ने व्यास पीठ पर माला अर्पित की, वहीं अरुण मोदी ने कथावाचक आचार्य पंडित रामकरण सहल का माल्यार्पण कर स्वागत किया। कथा के दौरान आचार्य पंडित रामकरण सहल ने कहा कि राम केवल एक नाम नहीं, बल्कि जीवन में अपनाने योग्य आचरण और कर्म का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम चाहते तो रावण का वध बैठे-बैठे ही कर सकते थे, लेकिन केवट, शबरी और अहिल्या जैसे भक्तों के उद्धार के लिए उन्हें वन यात्रा करनी पड़ी। भगवान का अवतार केवल राक्षस...