एटा, अक्टूबर 27 -- राजा का रामपुर। कस्बा के मडिया चौराहा स्थित हनुमान गड़ी मंदिर में चल रही राम कथा के चौथे दिन रविवार को कथा व्यास आचार्य नारायण प्रसाद द्विवेदी ने श्रोताओं को राम कथा में धनुष यज्ञ का प्रसंग सुनाया। भगवान राम द्वारा शिव के धनुष को भंग करने की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि राजा जनक ने सीता के स्वयंवर के लिए शिव के इस भारी धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने की शर्त रखी थी। भगवान शिव के धनुष का नाम पिनाक था। वर्णन करते हुए कहा कि महाराजा जनक ने सीता के विवाह के लिए स्वयंवर रचाया। सीता के स्वयंवर में आए सभी राजा-महाराजा जब भगवान शिव का धनुष नहीं उठा सकें, तब ऋषि विश्वामित्र ने प्रभु श्रीराम से आज्ञा देते हुए कहा हे राम उठो, शिवजी का धनुष तोड़ो और जनक का संताप मिटाओ। गुरु विश्वामित्र के वचन सुनकर श्रीराम उठे और धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने ...