दुमका, मार्च 16 -- जामा। प्रतिनिधि जामा प्रखंड अंतर्गत बारापलासी हटिया परिसर में आयोजित श्री श्री 108 राम कथा ज्ञान यज्ञ में कथा के तीसरे दिन कथा वाचक आचार्य दुर्गेश नंदन जी महाराज ने भगवान श्रीराम के वनवास प्रसंग का अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, त्याग और मर्यादा के महत्व को विस्तार से बताया। आचार्य दुर्गेश नंदन ने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने पिता राजा दशरथ की आज्ञा का पालन करते हुए राजसिंहासन और सुख-सुविधाओं का त्याग कर 14 वर्षों का वनवास स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि श्रीराम का जीवन हमें सत्य, कर्तव्य और मर्यादा का पालन करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने माता सीता और लक्ष्मण के साथ वनवास जाने की घटना का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म और...