जौनपुर, मार्च 21 -- जलालपुर, हिन्दुस्तान संवाद। बाजार स्थित रामलीला मैदान में चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन शनिवार को प्रयागराज से पधारे मानस मर्मज्ञ कथा वाचक अंशपूर्णानंद महाराज ने भक्तों को कैकेई कोप भवन की कथा को भाव पूर्वक श्रवण कराया। कथा प्रसंग में श्रोताओं के बीच जैसे ही माता कैकेई द्वारा दशरथ महराज के उन दो वचनों का स्मरण कराया की भरत का राज्याभिषेक हो और राम को चौदह वर्ष का वनवास इतना सुनते ही पंडाल में मौजूद श्रोता बहुत ही मार्मिक और भाव विभोर हो गए। उन्होंने बताया कि मानस में तुलसीदास जी ने दर्शाया है कि कैकेयी का यह रूप शुद्ध रूप से उनका नहीं था, बल्कि देवताओं की प्रेरणा से सरस्वती जी ने उनकी बुद्धि फेर दी थी, ताकि राम के हाथों रावण का वध सुनिश्चित हो सके। राम जी के बाल चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि मर्यादा पुरुष...
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