मिर्जापुर, जून 11 -- लालगंज,हिन्दुस्तान संवाद। सिद्धेश्वर महादेव मंदिर परिसर, दीवानपुर में आयोजित सात दिवसीय रामकथा के चौथे दिन गुरुवार को कथावाचक धरमजी महाराज ने सीता-राम विवाह और एकादशी महात्म्य के प्रसंग की कथा सुनाया। उन्होंने कहा कि जनकपुर में संपन्न हुआ राम-सीता विवाह केवल एक वैवाहिक समारोह नहीं था बल्कि धर्म, मर्यादा, त्याग और आदर्श जीवन मूल्यों का महापर्व था। वहीं एकादशी व्रत मन और इंद्रियों को संयमित कर भगवान की भक्ति से जोड़ने का माध्यम है। कथावाचक ने बताया कि भगवान श्रीराम ने शिव धनुष भंग करने के बाद राजा जनक ने माता सीता का विवाह अयोध्या के राजकुमार श्रीराम के साथ संपन्न कराया।

विवाह समारोह का वातारण विवाहोत्सव में जनकपुर मंगलगीतों, वैदिक मंत्रोच्चार और उत्सव के उल्लास से सराबोर हो गया। उन्होंने कहा कि राम और सीता का दांपत्य ...