वाराणसी, मार्च 12 -- वाराणसी। काशी के संतों ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के रामानंदी संप्रदाय के खिलाफ दिए गए बयान पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। नरहरिपुरा के पातालपुरी मठ में बुधवार को जगद्गुरु बालक देवाचार्य की अध्यक्षता में हुई बैठक में संतों ने एक स्वर में उनके बयान का विरोध किया। जगद्गुरु बालक देवाचार्य ने कहा कि यदि कोई स्वयं को शंकराचार्य कहता है, तो उसे पहले भारत की आत्मा को समझना चाहिए। रामानंद महाराज के योगदान के बिना सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति का अस्तित्व नहीं होता। उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग राम, रामानंद और रामानंदी संप्रदाय के खिलाफ बोलेंगे, उनके खिलाफ काशी के 80 मठ एकजुट होंगे। पूरे देश के करोड़ों रामानंदी अनुयायी सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। अन्य संतों ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद स्वयं को धर्मसम्राट समझने के...