अयोध्या, दिसम्बर 30 -- अयोध्या। रामकथा में रसवर्षा करते हुए जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी राम दिनेशाचार्य ने कहा कि अयोध्या की पौराणिकता की पहचान कल-कल निनादिनी मां सरयू का अजस्र प्रवाह पहले भी था। मठ-मंदिरों की श्रृंखला और उसमें गूंजित मंत्रों के स्वर भी कानों मे पड़ते थे। फिर भी अयोध्या निष्प्राण थी। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा से प्राणवंत द्वादशी के बाद वैश्विक सांस्कृतिक मंच पर अयोध्या धाम की भी प्रतिष्ठा हो गयी। इस तथ्य को झुठलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि बालक राम सहज सुलभ है । आचार्य प्रवर ने कहा कि बालक राम की प्रतिष्ठा उसी हृदय में संभव है जिसका हृदय में बालक के समान हो। इस अवसर पर मंच संचालन अवधेश निवास मंदिर के महंत रामशरण दास व्यास ने किया। वहीं तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी डा. अनिल मिश्र व मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव के साथ...
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