धनबाद, मार्च 28 -- मुझको कीर्ति न वैभव ना यश चाहिए, राम के नाम का मुझको रस चाहिए... , सुख मिले ऐसे अमृत को पीने में, श्रीराम-जानकी बैठे हैं मेरे सीने में... कुछ ऐसे ही गीतों और जय श्रीराम के गगनभेदी नारों ने पूरा कोयालांचल गुंजायमान हुआ। रामनवमी पर शुक्रवार को राम भक्तों ने ऐसी तान छेड़ी कि धरा गीत और बादल सरगम हो गए। भक्तों के बीच आस्था और भक्ति का सैलाब उमड़ा। राम के भक्तों ने मस्तक पर लाल तिलक लगाकर जहां समर्पण, विजय और आत्मविश्वास का परिचय दिया, वहीं पगड़ी और दस्तार ने सम्मान और स्वाभिमान से भर दिया जबकि हाथों में तलवार लहराकर सनातन के असीम शौर्य का परिचय कराया। शहर की प्रत्येक सड़क, सभी मंदिर, दुकान, भवन, चौक-चौराहा और शहर का एक-एक कोना महावीरी पताकों से लहरा रहा था। दिन में जहां घर-घर धर्म ध्वज स्थापित किए गए, मंदिरों में महावीरी पत...