संवाददाता, मार्च 27 -- मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव रामनवमी पर अयोध्या ने एक बार फिर आस्था, श्रद्धा और दिव्यता का अप्रतिम दृश्य प्रस्तुत किया। मध्याह्न ठीक 12 बजे, जब सम्पूर्ण सृष्टि मानो उस पावन क्षण की प्रतीक्षा में वह थम सी गई, तब अखिल ब्रह्माण्ड नायक के अवतरण की भावना के अनुरूप रामलला का प्राकट्य हुआ और उसी क्षण सूर्य की स्वर्णिम किरणों ने उनके मस्तक पर दिव्य सूर्य तिलक अंकित कर दिया। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए भाव-विभोर कर देने वाला था। रामलला के ललाट पर किरणें पड़ती रहीं। राम मंदिर श्रीराम के नारों से गूंजता था। लाखों की संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहंचे हैं।रामलला का सूर्य तिलक सूर्य तिलक की यह अद्भुत व्यवस्था परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय का अनूठा उदाहरण है। विशेष तकनीकी संयोजन के माध्यम से सूर्य की किरणों ...