रामगढ़, मार्च 21 -- रामगढ़, शहर प्रतिनिधि। आदिवासी भूमि के प्रबंधन और हस्तांतरण से जुड़े मामलों की लेखा जांच (ऑडिट) को लेकर झारखंड में विवाद गहराता जा रहा है। रामगढ़ के जीपी संजीव कुमार अम्बष्ठ ने इस मुद्दे पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को पत्र लिखकर झारखंड के महालेखाकार (एजी) की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। साथ ही जल्द हस्तक्षेप रोकने की मांग की है। पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आदिवासी भूमि से जुड़े मामले (छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम) और (संताल परगना काश्तकारी अधिनियम) के तहत नियंत्रित होते हैं। जिनकी प्रकृति अर्द्ध-न्यायिक है। ऐसे मामलों में लिए गए निर्णयों की समीक्षा केवल सक्षम राजस्व प्राधिकारियों-जैसे आयुक्त और राजस्व बोर्ड-द्वारा ही की जा सकती है। विशेष रूप से सीएनटी एक्ट की धारा 49 और 71ए का हवाला देते हुए कहा गया है...
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