नई दिल्ली, अप्रैल 15 -- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में हिंदू पक्ष के एक याचिकाकर्ता ने बुधवार को दावा किया कि धार के विवादित भोजशाला परिसर की बनावट परमार राजवंश के राजा भोज की लिखी पुस्तक 'समरांगणसूत्रधार' में मंदिरों के निर्माण के लिए तय पैमानों से हू-ब-हू मेल खाती है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की पीठ के समक्ष हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ताओं में एक कुलदीप तिवारी के वकील मनीष गुप्ता ने 11वीं सदी के इस स्मारक को मूलत: 'सरस्वती मंदिर-सह-संस्कृत अध्ययन केंद्र' बताते हुए अदालत से इसमें केवल हिंदुओं को उपासना का अधिकार देने की गुहार लगाई। यह पुस्तक परमारकालीन मंदिरों, मूर्तियों, नगरों, महलों, नगरों और घरों की विशिष्ट वास्तुकला पर आधारित है। यह भी पढ़ें- सबरीमाला मंदिर: सुधार के नाम पर किसी धर्म को खोखला नहीं किया जा सकता- ...