नई दिल्ली, अक्टूबर 23 -- राजस्थान में सूरज की रोशनी से बिजली बनाने की क्षमता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अब यही बिजली व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनती दिख रही है। राज्य में करीब 18,000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता के बीच लगभग 10,000 मेगावाट क्षमता पर कटौती का असर होने की खबर है। अक्षय ऊर्जा उत्पादकों को 20 प्रतिशत उत्पादन घटाने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि बिजली कम बनेगी, बल्कि यह भी है कि इसका असर कंपनियों की कमाई, निवेश, बिजली प्रबंधन और भविष्य की सौर परियोजनाओं पर कितना पड़ सकता है। दिन में बिजली की भरमार और शाम को बढ़ती जरूरत के बीच राजस्थान का ऊर्जा तंत्र ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां बिजली बनाने की क्षमता बढ़ाना ही काफी नहीं होगा। उसे सही समय पर इस्तेमाल करने की व्यवस्था भी करनी होगी।1. सोलर कंपनियों की कम...