नई दिल्ली, सितम्बर 4 -- राजस्थान के निकाय चुनाव में टिकटों ने नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच रिश्तों का भी इम्तिहान ले लिया है। कहीं टिकट नहीं मिलने का गुस्सा इतना फूटा कि जिलाध्यक्ष ही निशाने पर आ गए, कहीं आंसुओं ने रास्ता पकड़ लिया और केंद्रीय मंत्री के गले लगकर कार्यकर्ता ने अपना दर्द हल्का किया। उधर दौसा में तो कहानी ही उलटी निकली-जिसने टिकट मांगा तक नहीं, उसके नाम पर टिकट जारी हो गया! राजस्थान में निकाय चुनाव के टिकटों का बंटवारा होते ही राजनीतिक गलियारों में एक नया मुहावरा चल पड़ा है-"झोली खाली है, लेकिन कार्यकर्ता भरे-भरे घूम रहे हैं।" टिकट की आस लगाए बैठे कई कार्यकर्ताओं के चेहरे पर अब उम्मीद की जगह नाराजगी दिखाई दे रही है। ऐसे में टिकट बांटने में भूमिका निभाने वाले नेताओं को भी अगले कुछ दिन थोड़ा संभलकर चलने की सलाह दी जा सकती है।...