नई दिल्ली, मई 2 -- कभी-कभी हकीकत भी फिल्मों से ज्यादा दिलचस्प हो जाती है और झुंझुनूं में गुरुवार को कुछ ऐसा ही देखने को मिला। यहां शिक्षा विभाग में एक ऐसा 'सीन' खेला गया, जिसने लोगों को सीधे फिल्म नायक और उसके 'वन डे सीएम' अनिल कपूर की याद दिला दी। फर्क बस इतना कि वहां एक दिन में सिस्टम हिल गया था, और यहां एक घंटे में कहानी ही खत्म हो गई। मनोज कुमार ढाका एक ऐसा नाम जो पहले ही विवाद और कोर्ट-कचहरी के फेर में था अचानक सुर्खियों में आ गया। गुरुवार शाम 5 बजे उन्होंने झुंझुनूं में प्रारंभिक जिला शिक्षा अधिकारी (डीईईओ) की कुर्सी संभाली। माहौल ऐसा था जैसे कोई बड़ा बदलाव होने वाला हो। कुर्सी सजी, लोग जुटे, फूल-मालाएं आईं, कैमरे चमके. लेकिन असली कहानी तो अभी बाकी थी। घड़ी की सुइयां जैसे ही आगे बढ़ीं, पूरा 'सरकारी ड्रामा' फास्ट ट्रैक पर दौड़ पड़ा। ...