रिषिकेष, जनवरी 22 -- आजादी के बाद समूचे देश से राजतंत्र समाप्त हो गया है और टिहरी रियासत भी गणतंत्र में शामिल हो गई है, लेकिन यह उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत ही कही जाएगी कि राज्य की परंपरा में प्रतीकात्मक रूप से राजतंत्र आज भी जीवित है। प्राचीनकाल में राजा को भगवान का रूप कहा जाता था। इसलिए टिहरी नरेश को गढ़वाल में बुलांदा बदरी कहा जाता है। आज भी बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि पौराणिक परंपरा के अनुसार टिहरी नरेश ही घोषित करते हैं। हिन्दुओं के करोड़ों श्रद्धालुओं के आस्था का प्रतीक बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने का मुहूर्त निकालने की परंपरा पौराणिक है। मान्यता है कि जगदगुरू शंकराचार्य ने जब बदरीधाम की स्थापना की तभी से कपाट खुलने की तिथि टिहरी नरेश ही निकाल रहे हैं। वसंत पंचमी के दिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद राज पुरोहित...