बदायूं, फरवरी 24 -- बिसौली। इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र महीने रमजान के अवसर पर मौलाना शादाब रजा उवैसी ने इबादत और संयम का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि रमजान केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपनी आंख, कान, जुबान और दिल को बुराइयों से दूर रखने का अनुशासन है। मौलाना ने स्पष्ट किया कि रमजान का पहला अशरा शुरुआती 10 दिन रहमत का होता है, जिसमें अल्लाह की विशेष कृपा बरसती है। इसके बाद दूसरा हिस्सा मगफिरत और तीसरा जहन्नम से निजात का है। उन्होंने जोर दिया कि इस महीने में गरीबों, यतीमों और असहायों की मदद करना ही सच्ची इबादत है। नेक कामों का सवाब कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए हर लम्हे की कद्र करते हुए खुद को अल्लाह की राह में समर्पित करना चाहिए। सब्र करने वालों के लिए जन्नत का वादा किया गया है।
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