सीवान, दिसम्बर 9 -- जसीवान, हिन्दुस्तान संवाददाता कहते हैं, नशा जब मेहनत का हो तो कामयाबी मुकद्दर बन जाती है। सिर पर प्रभु की छाया व परिजनों का आर्शीवाद हो तो मंजिल मिल ही जाती है। जिले के महाराजगंज प्रखंड के बज़रहियां गांव के श्रीकृष्ण चौबे के सुपुत्र रवि राज ऐसी ही एक शख्सियत हैं, जिन्होंने अपनी एकाग्रता, लक्ष्य के प्रति समर्पण व सेवा भाव से एक ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसकी चहुंओर चर्चा हो रही है। रविराज के मुख से रामायण की पंक्ति रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर बचन न जाई व मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सु दशरथ अजिर बिहारी सुन जहां लोग भावविहृल हो रहे, वहीं, सीता हरण, लक्ष्मण जी को बाण लगने जैसे प्रसंगों को सुनकर आंख से आंसू भी निकल पड़ रहे। बहरहाल, दस वर्ष पूर्व घर व सरकारी नौकरी छोड़ मायानगरी मुंबई का रुख करने वाले रविराज के मुख से...
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